एक प्याला चाय मेरे साथ….!

अक्टूबर 6, 2008

किसी की कोई जिम्मेदारी नही….!!!

Filed under: Uncategorized — Gaurav Sangtani @ 3:55 अपराह्न
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क्या सरकार की कोई जिम्मेदारी नही?

 

यु पी ऐ सरकार का बर्ताव पिछले कुछ दिनों से कितना गैर जिम्मेदारना रहा है, इस पर शायद ही किसी को कोई शक हो | शायद सरकार ये बताना चाहती है कि वो किसी कम या घटना के लिए जिम्मेदार ही नही | उसके हाथ में कुछ भी नही….. आइये कुछ छोटे से नमूने देखें इसके:

४. नम्बर चार पे आते है हमारे प्रिय प्रियरंजन दस मुंशी : जब टाटा, पश्चिम बंगाल सरकार और त्रिन मूल के बीच वार्ता चल रही थी, तब ये लोग शांत बैठे थे…. जब टाटा की फैक्ट्री पे कम रुकवा दिया गया तब ये सो रहे थे…. और जब वार्ता विफल हो गई तब भी ये आराम कर रहे थे……!!! पर जब टाटा में घोषणा की वो सिंगुर से वापस जा रहे है तो मुंशी साहब को दिखा कि सिंगुर के आलावा बाकि बंगाल खुश नही है… मौका कई वोट बनने का… बोले ” ऐसे कैसे जा सकते हैं टाटा वाले??? ज़मीन ख़राब कर दी हमारी अब तो फैक्ट्री लगानी ही पड़ेगी | हम तो जाने नही देंगे….”

अब ये गन पॉइंट पे फैक्ट्री लगवाएंगे ….

३. इस हफ्ते नम्बर ३ पे चल रहे हैं हमारे गृह मंत्री जी…. श्री श्री १०२१ शिव राज पाटिल जी…

एक पर एक धमाके होते रहे और ये कपड़े बदलते रहे… हर दफा वो ही घिसा पिटा बयां “हम देखा रहे हैं हम करेंगे….” कही से नही लगा था एक मजबूत गृह मत्री की छवि…

यहाँ तक कि जब पार्टी वालो ने भी इस्तीफा माँगा तो बोले “नैतिक जिम्मेदारी वगैरह मैं नही जानता…. जनता ने बनाया नही मुझे मत्री, तो जनता के प्रति क्या नैतिक जिम्मेदारी…. मैडम ने बनाया है….. वो बोलेंगी तो ही इस्तीफा दूंगा….

 

जय जय मैडम….

 

२. और नम्बर २ पर प्यारे से भोले से ऑस्कर फ़र्नान्डिस जी…

कर्मचारियों ने सीईओ को पीट पीट के मर डाला तो क्या बुरा किया….. बोले “इससे कुछ सीखना चाहिए मैनेजमेंट को, नही तो यूँ ही मरोगे….” इन्हे लगा वाम पंथियों से पहले कर्मचारियों कि सहानुभूति ले लें….

अरे भाई सीईओ कोई वोट थोड़े ही देता है… और अगर देगा भी तो एक…. पॉँच सौ कर्मचारियों के वोट और उनके भी जो सीईओ को पीटने की तैयारी में हैं…

पासा तो सही था पड़ उल्टा गया… माफ़ी मांगनी पड़ी

 

१. नम्बर एक पे तो हैं माननीय मुख्या मंत्री जी…. शीला दीक्षित

जब आपको पता है की बहार गुंडे हो सकते हैं तो घर से बहार क्यों निकलते हो…. यही कुछ कहा मैडम ने…. एक राज्य वो भी राष्ट्रीय राजधानी की मुख्यमंत्री हो के…. एक मर्डर की कोई जिम्मेदारी नही…

यहाँ तक कह दिया की लड़कियों को रात में बहार नही निकलना चाहिए…. गुंडों का हम कुछ नही कर सकते…

कितनी मजबूर हैं ये अरे हमें समझाना चाहिए…. दिल्ली में हुए धमाको के जिम्मेदार भी वही लोग जो बेकार में बाज़ार में घूम रहे थे….. 

माना की फैशन के युग में गारंटी और जिम्मेदारी की इच्छा करना बेकार है…. पर जनता जाएगी कहाँ….

 

क्या आपको नही लगता इस सरकार के साथ कुछ ग़लत है…. या कोई सरकार है ही नही क्योंकि किसी कि कोई जिम्मेदारी नही

 

- गौरव संगतानी

अक्टूबर 1, 2008

क्यों इंडियन मुजाहिदीन?

Filed under: Uncategorized — Gaurav Sangtani @ 7:30 अपराह्न
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क्यों इंडियन मुजाहिदीन?

 

मैं एक वेबसाइट पे एक अर्टिकल पड़ रहा था जो की कहता है की इंडियन मुजाहिदीन का अगला निशाना होगा चंडीगढ़ | मैंने एक बात सोची क्यों हम इन्हे इंडियन मुजाहिदीन कहते हैं ? केवल इसलिए की वोह ख़ुद को कहते हैं ? ये तो सही नही है | असल में इस शब्द का अर्थ क्या है ?

एक सामान्य नेट सर्फ़र की तरह मैंने भी विकिपीडिया खोला तो पाया की इसका अर्थ होता है “एक मुस्लिम जो की जिहाद में संलग्न हो अर्थात जो किसी युद्ध में लड़ रहा हो या किसी संघर्ष में हो ” | तो पहले तो वो ख़ुद को मुस्लिम बताना चाहते हैं और किसी युद्ध में लड़ता हुआ… | हालाँकि इस तरह के हमले किसी भी तरह युद्ध से तुलना नही किए जा सकते.. चलो फिर भी मन लेते हैं…

 

मेरी परेशानी है पहले शब्द से “इंडियन” | ये लोग इंडियन कैसे हो सकते हैं? नही बिल्कुल नही… ये इंडियनस के खिलाफ आतंक फैलाते हैं और इंडियनस को ही मारते हैं…. इनका शिकार होने के लिए आपको बस इंडियन होना चाहिए… ये किसी जाति, धर्म विशेष के लोगों पे हमले नही करते… दिल्ली धमाकों से सभी तरह के लोग प्रभावित हुए हैं.. ये लोग भारत और भारतियों के खिलाफ ही लड़ रहे हैं…

 

तो ये ख़ुद को कुछ भी कह सकते हैं… मैं इस संगठन को इस नाम से संबोधित करने से इंकार करता हूँ…. आइये इस नाम को बदल दें और आज से कहे नॉन इंडियन मुजाहिदीन

 

अगर ज्यादा कुछ नही कर सकते तो… आइये कम से कम इनसे भारतीय होने का हक ले लें…. ये हैं नॉन इंडियन मुजाहिदीन.. आइये पहले सही शब्दों का प्रयोग करें और फिर इन भारत विरोधी और इंडियन विरोधी शक्तियों से लड़ें…

 

 मेरा साथ दें और मैं मीडिया से भी आग्रह करूंगा की इन्हे उस ग़लत शब्द से संबोधित न करें….

- गौरव संगतानी

मई 13, 2008

Ishwar allah

Filed under: Uncategorized — Gaurav Sangtani @ 9:07 अपराह्न

फ़रवरी 4, 2008

थोङी देर कर दी

Filed under: Uncategorized — Gaurav Sangtani @ 6:52 अपराह्न

चलिए आज चाय की मेज पर बात करते हैं एक कहानी की जो मैने कल ही पढी है, बहुत ही सुँदर…..
अरे ये क्या आपने चाय नहीं उठायी, ठंडी हो जाएगी.
हाँ तो मैं कह रहा था बहुत ही सुँदर कहानी है, कहानी कुछ इस तरह है….

एक दफा गौतम बुद्द एक गाँव से जा रहे थे वो गाँव ब्राहम्णों का गाँव था और वो सब उनसे बहुत नाराज़ थे
उन लोगों ने गौतम बुद्द को जी भर के गालियाँ दी बहुत बुरा भला कहा पर गौतम बुद्द सब कुछ शाँत भाव से सुनते रहे
जब वो लोग चुप हो गये तो गौतम बुद्द बोले
“यदि आप सब कह चुके तो मैं चलना चाहूँगा यदि नहीं तो मैं तो रुक सकता हूँ”

इस पर एक व्यक्ति बोला
“तुम जानते हो हम तुम्हे क्या बोल रहे हैं तुम पलट कर कुछ क्यों नहीं बोलते”

गौतम बुद्द बोले “तुमने थोङी देर कर दी मेरे भाई
यही सब तुमने अगर दस साल पहले कहा होता तो यहाँ कोई जीवित नहीं बचता
अब मैं तुमसे एक प्रश्न पूछता हूँ
इससे पहले हम एक गाँव में गये थे वहाँ लोग हमारे लिए मिठाईयाँ और फल लाए थे चूँकि हम दिन में एक दफा ही भोजन करते हैं
और हम लोग भोजन कर चुके थे और हम अपने साथ कुछ नहीं रखते हम वो भोजन स्वीकार नहीं कर पाए और सप्रेम लौटा दिया
आप को क्या लगता है उन्होने उस भोजन का क्या किया होगा”

एक व्यक्ति बोला “इसमें क्या रहस्य की बात है उन्होने आपस में बाँट लिया होगा”

गौतम बुद्द बोले
“बस यही दुख है मैंने तुम्हारी गालियों और घृणा को भी आज स्वीकार नहीं किया
तुम इसका क्या करोगे अपने बीबी, बच्चों और पडोसियों में बाँट दोगे”

फ़रवरी 3, 2008

आइये एक प्याला चाय हो जाए…..!

Filed under: Uncategorized — Gaurav Sangtani @ 6:52 अपराह्न

आज एक सफर की शुरुआत हो जाए …….!
रोज सुबह बैठें और कुछ बात हो जाए…….!
एक प्याला चाय हमारे साथ हो जाए……!
चाय तो एक बहाना है, आप से कुछ बतियाना है…..!

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