क्या सरकार की कोई जिम्मेदारी नही?
यु पी ऐ सरकार का बर्ताव पिछले कुछ दिनों से कितना गैर जिम्मेदारना रहा है, इस पर शायद ही किसी को कोई शक हो | शायद सरकार ये बताना चाहती है कि वो किसी कम या घटना के लिए जिम्मेदार ही नही | उसके हाथ में कुछ भी नही….. आइये कुछ छोटे से नमूने देखें इसके:
४. नम्बर चार पे आते है हमारे प्रिय प्रियरंजन दस मुंशी : जब टाटा, पश्चिम बंगाल सरकार और त्रिन मूल के बीच वार्ता चल रही थी, तब ये लोग शांत बैठे थे…. जब टाटा की फैक्ट्री पे कम रुकवा दिया गया तब ये सो रहे थे…. और जब वार्ता विफल हो गई तब भी ये आराम कर रहे थे……!!! पर जब टाटा में घोषणा की वो सिंगुर से वापस जा रहे है तो मुंशी साहब को दिखा कि सिंगुर के आलावा बाकि बंगाल खुश नही है… मौका कई वोट बनने का… बोले ” ऐसे कैसे जा सकते हैं टाटा वाले??? ज़मीन ख़राब कर दी हमारी अब तो फैक्ट्री लगानी ही पड़ेगी | हम तो जाने नही देंगे….”
अब ये गन पॉइंट पे फैक्ट्री लगवाएंगे ….
३. इस हफ्ते नम्बर ३ पे चल रहे हैं हमारे गृह मंत्री जी…. श्री श्री १०२१ शिव राज पाटिल जी…
एक पर एक धमाके होते रहे और ये कपड़े बदलते रहे… हर दफा वो ही घिसा पिटा बयां “हम देखा रहे हैं हम करेंगे….” कही से नही लगा था एक मजबूत गृह मत्री की छवि…
यहाँ तक कि जब पार्टी वालो ने भी इस्तीफा माँगा तो बोले “नैतिक जिम्मेदारी वगैरह मैं नही जानता…. जनता ने बनाया नही मुझे मत्री, तो जनता के प्रति क्या नैतिक जिम्मेदारी…. मैडम ने बनाया है….. वो बोलेंगी तो ही इस्तीफा दूंगा….
जय जय मैडम….
२. और नम्बर २ पर प्यारे से भोले से ऑस्कर फ़र्नान्डिस जी…
कर्मचारियों ने सीईओ को पीट पीट के मर डाला तो क्या बुरा किया….. बोले “इससे कुछ सीखना चाहिए मैनेजमेंट को, नही तो यूँ ही मरोगे….” इन्हे लगा वाम पंथियों से पहले कर्मचारियों कि सहानुभूति ले लें….
अरे भाई सीईओ कोई वोट थोड़े ही देता है… और अगर देगा भी तो एक…. पॉँच सौ कर्मचारियों के वोट और उनके भी जो सीईओ को पीटने की तैयारी में हैं…
पासा तो सही था पड़ उल्टा गया… माफ़ी मांगनी पड़ी
१. नम्बर एक पे तो हैं माननीय मुख्या मंत्री जी…. शीला दीक्षित
जब आपको पता है की बहार गुंडे हो सकते हैं तो घर से बहार क्यों निकलते हो…. यही कुछ कहा मैडम ने…. एक राज्य वो भी राष्ट्रीय राजधानी की मुख्यमंत्री हो के…. एक मर्डर की कोई जिम्मेदारी नही…
यहाँ तक कह दिया की लड़कियों को रात में बहार नही निकलना चाहिए…. गुंडों का हम कुछ नही कर सकते…
कितनी मजबूर हैं ये अरे हमें समझाना चाहिए…. दिल्ली में हुए धमाको के जिम्मेदार भी वही लोग जो बेकार में बाज़ार में घूम रहे थे…..
माना की फैशन के युग में गारंटी और जिम्मेदारी की इच्छा करना बेकार है…. पर जनता जाएगी कहाँ….
क्या आपको नही लगता इस सरकार के साथ कुछ ग़लत है…. या कोई सरकार है ही नही क्योंकि किसी कि कोई जिम्मेदारी नही
- गौरव संगतानी

sahi kahaa aapane. koi sarakaar hi nahi hai.
Comment by S.B.Singh — अक्टूबर 6, 2008 @ 4:21 अपराह्न |
nice job…..
Comment by Nikhil — अक्टूबर 6, 2008 @ 5:08 अपराह्न |
सही कह रहे हैं!!
Comment by समीर लाल ’उड़न तश्तरी वाले’ — अक्टूबर 7, 2008 @ 1:05 पूर्वाह्न |
आज की राजनीति बेशर्मों के द्वारा खेला जा रहा खेल है । यह अब यूं चलता रहेगा । अगर इससे निजात पाना हो तो इसका बहिष्कार ही एक रास्ता है । गांधीजी भी इसी नीति को अपनाते थे जब कोई सुनने वाला न रहे । – योगेन्द्र जोशी (indiaversusbharat.wordpress.com; hinditathaakuchhaur.wordpress.com;
jindageebasyaheehai.wordpress.com; vichaarsankalan.wordpress.com)
Comment by योगेन्द्र — अक्टूबर 7, 2008 @ 4:22 पूर्वाह्न |